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1 तवारीख़ 9:33 - किताब-ए मुक़द्दस

33 मौसीक़ार भी लावी थे। उनके सरबराह बाक़ी तमाम ख़िदमत में हिस्सा नहीं लेते थे, क्योंकि उन्हें हर वक़्त अपनी ही ख़िदमत सरंजाम देने के लिए तैयार रहना पड़ता था। इसलिए वह रब के घर के कमरों में रहते थे।

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इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019

33 और यह वह हम्द करने वाले हैं जो लावियों के आबाई ख़ानदानों के सरदार थे और कोठरियों में रहते और और ख़िदमत से मा'ज़ूर थे, क्यूँकि वह दिन रात अपने काम में मशग़ूल रहते थे।

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1 तवारीख़ 9:33

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