प्रकास 18:3 - चितवनिया थारु3 केहकेकि जम्मे जतियाक मन्सावाह मोद पियले नहिँया यापन खराब इछा लागल चिजु करके परमेस्वरके आराधना हइने करसइ। संसारक रजवाह वकरसाङे धुचुड करले बडइ हसे संसारक व्यपरियवाह वकर हइने मेटइना भोग-विलासक कारन धनि भेल बडइ।” See the chapter |