प्रकास 15:4 - चितवनिया थारु4 हे परमप्रभु, यपनहुँक डर कुने नाहिँ मान्तइ? हसे यपनहुँक नाउँक महिमा कुने नाहिँ करतइ? केहकेकि यपनहुँ मतरे पवितर बडहुँ। जम्मे जतिया याके यपनहुँके मान-यादर करतइ, केहकेकि यपनहुँक धारमिक कामसभ देखार भेल बडइ।” See the chapter |