मतिक लिखल सुसमाचार 6:5 - चितवनिया थारु5 “तोहरा परथाना करइखुनि कपटियानि नहिँया परथाना झिन करिह। हुनुका त सभाघरवाह हसे गलियावाक चोकवामा ठडियाके याको मन्सावाह देखइ कहके परथाना करसइ। मुइ सदियो तोहराके कहबहिँ, हुनुका यापन इनाम पासकले बडइ। See the chapter |