15 “हे प्रभु! मिंडै पुत्रा पन दया कर, केईनी कि तेसनी मिर्गी ऐईंती, जां सै बड़ै दुख सेहन काता, जां बार-बार आगी मझ, बार-बार पांणी मझ ढडै गांहथा।”