5 चौंकि जब हम पुराने स्वभाव के अनुसार जी रये हते, तौ हमारी पाप पूरन बासनाऐं जो व्यबस्था के द्वारा आयी हतीं, बू हमारे अंगन पै हावी हतीं और मौत कौ फल पैदा करतीं हतीं।