5 का तुम पबित्र सास्त्र में लिखी जा बात कूं बेकार समझें कै, परमेस्वर जानें हमारे भीतर पबित्र आतमा डारिए, जा बात की भौत लालसा करै कै हम भरोसे योग्य बने रैहमें?