29 हे भईया हरौ, मैं ऊ कुलपति दाऊद के बारे में तुम से हिम्मत कर के कै सकत आंव कि बो तो मर गओ और गाड़ो सोई गओ और ऊकी कबर आज लौ हमाए इते बनी भई आय।