प्रकाशित वाक्य 9:17 - हरियाणवी17 अर मन्नै अपणे दर्शन म्ह घोड़े अर उसके इसे सवार दिक्खे, उनकै धोरै कवच था जो लाल, गहरा नीला अर गन्धक की तरियां पीळा था, अर उन घोड्या के सिर शेर कै सिर बरगे थे, अर उनके मुँह तै आग, अर धुम्मा, अर गन्धक लिकड़ै थी। See the chapter |