प्रकाशित वाक्य 2:27 - हरियाणवी27 मै उसनै भी राज करण का वोए हक देऊँगा जो मेरे पिता नै मेरे ताहीं दिया सै, वो उनपै बिना दया के राज करैगा, अर वो उन ताहीं चकणाचूर कर देवैगा, जिस ढाळ कुम्हार के माट्टी के बासण चकणाचूर हो जावै सै। अर मन्नै भी इसाए हक अपणे पिता तै मिल्या सै। See the chapter |