23 फेर उसनै उन ताहीं भीत्त्तर बुलाकै उनकी मेहमान-नवाजी करी। दुसरे दिन वो उनकै गेल्या गया, अर याफा नगर के बिश्वासी भाईयाँ म्ह तै कुछ उसकै गेल्या हो लिए।