36 जइसन पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय, कि “हम पंचे दिन भर कतल होंइ के खातिर सँउपे जइत हएन; अरथात हम पंचे बली होंइ बाली गड़रन कि नाईं समझे जइत हएन।”