5 एसे अधिकारिन के बातन काहीं मानब, केबल परमातिमा के क्रोध के डेरय भर से जरूरी नहिं आय, बलकिन तोंहार पंचन के सोच-बिचार घलाय गबाही देत हय, कि इआ बात सही आय।