19 काहेकि ऊँ घोड़न के सक्ती उनखे मुँहे, अउर उनखे पूँछन माहीं रही ही; एसे कि उनखर पूँछ साँपन कि नाईं रही हँय, अउर उनखे पूँछन माहीं मूँड़ घलाय रहे हँय, अउर उनहिन से ऊँ पंचे पीरा पहुँचाबत रहे हँय।