10 हम तोंहईं धीरज धरँय के खातिर कहेन तय, त तूँ धीरज धरे हया, एसे हमहूँ तोंहईं परिच्छा के उआ समय बचाइके रक्खब, जउन धरती माहीं रहँइ बालेन के जाँचय-परखँय के खातिर, सगले संसार माहीं आमँइ बाली हय।