46 काहेकि अगर तूँ पंचे अपने प्रेम करँइ बालेन भर से प्रेम करिहा, त तोंहरे खातिर का फायदा होई? का चुंगी लेंइ बाले घलाय इहइमेर नहीं करँइ?