9 पय जउन समझदार रही हँय उनहीं जबाब दिहिन, कि ‘हम न देब, काहेकि होइ सकत हय, कि इआ तेल हमरे अउर तोंहरे खातिर घलाय न पूजय; एसे उचित त इआ हय, कि तूँ पंचे बेंचँइ बालेन के लघे जाइके अपने खातिर तेल खरीद ल्या।’