8 अउर जउन मूरुख रही हँय, ऊँ पंचे समझदारन से कहिन, कि ‘अपने तेल म से थोरी क तेल हमहूँ पंचन काहीं घलाय दइ द्या; काहेकि हमार पंचन के मसालँय बुझाँय बाली हईं।’