32 ऊँ पंचे ऊँ लड़िकन कि नाईं हें, जउन बजार माहीं बइठे एक दुसरे से गोहराइके कहत हें, ‘हम तोंहरे खातिर बसुरी बजाएन, अउर तूँ पंचे नहीं नाच्या; अउर हम पंचे तोंहरे खातिर सोक के गाना गाएन, अउर तूँ पंचे नहीं रोया!’