16 ओखे बाद यीसु नासरत गाँव माहीं आएँ, जहाँ उनखर पालन-पोसन भ रहा हय; अउर अपने रीति के मुताबिक, पबित्र दिन काहीं सभाघर माहीं जाइके पबित्र सास्त्र पढ़ँइ के खातिर ठाढ़ भें।