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5.0★★★★★
4 हे ब्यभिचार करँइ बालिव! काहे तूँ पंचे नहीं जनते आह्या, कि संसार से दोस्ती करब, परमातिमा से दुसमनी करब आय? एसे जे कोऊ संसार के दोस्त होंइ चाहत हय, उआ अपने-आप काहीं परमातिमा के बइरी बनाबत हय।