6 जीभव आगिन कि नाईं होथी, इआ जीभ हमरे पंचन के देंह माहीं अधरम से भरा एकठे अंग आय, अउर इहय सगले देंह माहीं कलंक लगाबत ही, अउर सगले जीबन काहीं बरबाध कइ देत ही। इआ जीभ नरक के आगी कि नाईं धँधकत रहत ही।