1 एसे जब अराम के जघा माहीं उनखे जाँइ के वादा अबे तक हय, त हमहीं पंचन काहीं डेराँइ चाही; कहँव अइसा न होय, कि तोंहरे पंचन म से कोऊ उहाँ जाँइ से बंचित रहि जाय।