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5.0★★★★★
2 अउर तूँ पंचे महिमानन के स्वागत-सत्कार करब कबहूँ न बिसराया, काहेकि एहिन के द्वारा कुछ मनई अनजाने माहीं स्वरगदूतन के स्वागत-सतकार किहिन हीं।