1 हे मालिकव, तूँ पंचे इआ सुध रक्खा, कि तोंहरव पंचन के स्वरग माहीं एकठे मालिक हें, एसे अपने-अपने सेबकन के साथ निकहा बेउहार करा, अउर जउन उनखर हक्क होय उनहीं द्या।