39 पय अगर परमातिमा के तरफ से होई, त तूँ पंचे उनहीं कबहूँ मिटाए न पइहा; कहँव अइसा न होय, कि तूँ पंचे परमातिमा से घलाय लड़ँइबाले ठहरा।”