32 अउर हम पंचे ईं बातन के गबाह हएन, अउर पबित्र आत्मा घलाय गबाह हय, जउने पबित्र आत्मा काहीं परमातिमा उनहीं दिहिन हीं, जे उनखे हुकुम काहीं मानत हें।”