32 बिसुआस करँइ बालेन के मंडली एक चित्त, अउर एक मन के रही हय, इहाँ तक कि कउनव अपने धन-सम्पत काहीं, आपन नहीं कहत रहा आय, पय सगला साझे के रहा हय।