41 ‘हे बुराई करँइ बाले मनइव, देखा, अउर अचरज माना, अउर मिट जा; काहेकि हम तोंहरे दिनन माहीं एकठे काम करब; अइसन काम, कि अगर कोऊ तोंहसे ओखर चरचा करय, त तूँ पंचे कबहूँ बिसुआस न करिहा’।”