13 पबित्र सास्त्र माहीं लिखा हय, कि “हम बिसुआस किहेन रहा हय, एहिन से हम बोलित हएन।” हमरेव पंचन के भीतर उहय बिसुआस के आत्मा हय। अउर हमहूँ पंचे घलाय बिसुआस करित हएन, एहिन से हमहूँ पंचे घलाय बोलित हएन।