2 बाह भाई बाह, एखे बादव तूँ पंचे घमन्ड से फूले हया, पय का एखे बारे माहीं तोहईं पंचन काहीं पचिताँय क न चाही? अउर जे कोऊ अइसन अनुचित काम करत हय, त ओही अपने बीच से बहिरे न निकार देंइ चाही?