10 पय परमातिमा अपने आत्मा के द्वारा, उँइन बातन काहीं हमरे पंचन के खातिर प्रगट किहिन हीं, काहेकि परमातिमा के आत्मा सगली बातन भर काहीं नहीं, बलकिन परमातिमा के छिपी बातन काहीं घलाय जानत हय।