1 मोर प्रिये, तू बहोत सुन्नर अहा। घूँघट क ओट मँ तोहार आँखिन कबूतरे क आँखिन जइसी सरल अहइँ। तोहार केस लम्बा अउ लहरात भवा अहइँ जइसे बोकरी क बच्चन गिलाद क पहाड़ क ऊपर स नाचत उतरत होंइ।