1 हर राति आपन सेज पइ मइँ आपन मने मँ ओका हेरत हउँ। जउन मनसेधू मोर प्रिय अहइ, मइँ ओका हेरेउँ ह, मुला मइँ ओका नाहीं पाएउँ।