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5.0★★★★★
2 ओकर निआव सच्चे अउर धर्ममय अहइ। उ बड़ी वेस्या क उ निआव करेस, जउन आपन व्यभिचार स इ धरती क भ्रस्ट कइ दिहे रही, अपने दासन क मउत क बदला लइ लिहेस।”