17 एकरे बाद मइँ देखेउँ कि सूरज क ऊपर एक सरगदूत खड़ा अहइ। उ ऊँचे अकास मँ उड़इवाली सबहीं चिड़ियन स जोर क आवाज स कहेस, “आवा, परमेस्सर क महाभोज क बरे एकट्ठा होइ जा।