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5.0★★★★★
7 अइसेन दुट्ठ क मुँह सदा साप देत रहत ह। उ पचे दूसर जन क निन्दा करत हीं अउर काम मँ लिआवइ क सदा ही बुरी बुरी जोजना रचत रहत हीं।