25 मइँ उ मनइयन क नाहीं लखेउँ जेनका आप पठएन ह। साहब! उ बेकार मनई (नाबाल) प धियान जिन द्या। उ ठीक उहइ अहइ जइसे ओकर नाउँ अहइ। अउर उ फुरे ‘मूरख’ अहइ।