2 कुरि 1:6 - उर्दू हमअस्र तरजुमा6 अगर हम मुसीबत उठाते हैं, तो तुम्हारी तसल्ली और नजात के लिये उठाते हैं; और अगर तसल्ली पाते हैं, तो वह भी तुम्हारी तसल्ली के वास्ते, उस तसल्ली का असर यह होगा के तुम भी उन मुसीबतों को सब्र के साथ बर्दाश्त कर सकोगे जिन्हें हम बर्दाश्त करते हैं। Se kapitletइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20196 अगर हम मुसीबत उठाते हैं तो तुम्हारी तसल्ली और नजात के वास्ते और अगर तसल्ली पाते हैं तो तुम्हारी तसल्ली के वास्ते; जिसकी तासीर से तुम सब के साथ उन दुखों को बर्दाश्त कर लेते हो; जो हम भी सहते हैं। Se kapitletकिताब-ए मुक़द्दस6 जब हम मुसीबतों से दोचार होते हैं तो यह बात आपकी तसल्ली और नजात का बाइस बनती है। जब हमारी तसल्ली होती है तो यह आपकी भी तसल्ली का बाइस बनती है। यों आप भी सब्र से वह कुछ बरदाश्त करने के क़ाबिल बन जाते हैं जो हम बरदाश्त कर रहे हैं। Se kapitlet |