4 तोरासिके सभे बातसब सहैले सिखे पड्तौ, ताकी तुहेंसब आत्मिक रुपसे परिपक्क आर पूर्ण भ्याजहैं आर तोरासिमे कोनो बढियाँ चरित्रके कमी नैहौ।