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वाइज़ 1:8 - किताब-ए मुक़द्दस

8 इनसान बातें करते करते थक जाता है और सहीह तौर से कुछ बयान नहीं कर सकता। आँख कभी इतना नहीं देखती कि कहे, “अब बस करो, काफ़ी है।” कान कभी इतना नहीं सुनता कि और न सुनना चाहे।

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इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019

8 सब चीजें मान्दगी से भरी हैं, आदमी इसका बयान नहीं कर सकता। आँख देखने से आसूदा नहीं होती, और कान सुनने से नहीं भरता।

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वाइज़ 1:8

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