2 कुरि 1:4 - किताब-ए मुक़द्दस4 जब भी हम मुसीबत में फँस जाते हैं तो वह हमें तसल्ली देता है ताकि हम औरों को भी तसल्ली दे सकें। फिर जब वह किसी मुसीबत से दोचार होते हैं तो हम भी उनको उसी तरह तसल्ली दे सकते हैं जिस तरह अल्लाह ने हमें तसल्ली दी है। Se kapitletइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 20194 वो हमारी सब मुसीबतों में हम को तसल्ली देता है; ताकि हम उस तसल्ली की वजह से जो ख़ुदा हमें बख़्शता है उनको भी तसल्ली दे सकें जो किसी तरह की मुसीबत में हैं। Se kapitletउर्दू हमअस्र तरजुमा4 वोही हमारी सारी मुसीबतों में हमें तसल्ली देता है, ताके हम उस ख़ुदादाद तसल्ली से दूसरों को भी तसल्ली दे सकें जो किसी भी तरह की मुसीबत में मुब्तिला हैं। Se kapitlet |