2 कुरि 1:17 - किताब-ए मुक़द्दस17 आप मुझे बताएँ कि क्या मैंने यह मनसूबा यों ही बनाया था? क्या मैं दुनियावी लोगों की तरह मनसूबे बना लेता हूँ जो एक ही लमहे में “जी हाँ” और “जी नहीं” कहते हैं? Se kapitletइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201917 पस मैंने जो इरादा किया था शोखमिज़ाजी से किया था? या जिन बातों का इरादा करता हूँ क्या जिस्मानी तौर पर करता हूँ कि हाँ हाँ भी करूँ और नहीं नहीं भी करूँ? Se kapitletउर्दू हमअस्र तरजुमा17 क्या तुम लोग यह सोचते हो के मैंने अपना इरादा बदल दिया और मैं ऐसा दुनियादार हूं के पक्का इरादा कर ही नहीं सकता? और अगर करता हूं तो उस में “हां की, हां” भी होती है और “नहीं की, नहीं” भी। Se kapitlet |