24 एसे परमातिमा उनहीं पंचन काहीं उनखे मन के बुरी इच्छन के मुताबिक असुद्ध होंइ के खातिर छोंड़ दिहिन, कि ऊँ पंचे ब्यभिचार माहीं परिके आपस माहीं अपने देंहन के अपमान करँय।