23 काहेकि जे कोऊ, परमातिमा के बचन काहीं सुनत त हय, पय ओखे मुताबिक चलय नहीं, त उआ, उआ मनई कि नाईं होत हय, जउन आपन मुँह अइना माहीं देखत हय,