7 काहेकि परमातिमा हमहीं पंचन काहीं डेराँइ बाली आत्मा नहीं दिहिन, कि हम पंचे डेरई, बलकिन सामर्थ के अउर प्रेम करँइ बाली खुद काहीं काबू माहीं रक्खँइ बाली आत्मा दिहिन हीं।