11 हे सापीर क निवासिन, तू अपने राहे नंगी अउर लज्जा होइके चली जा। उ सबइ लोग, जउन सानान क बसइया अहइँ, बाहेर नाहीं निकरिहीं। बेतेसेल क लोग रोवत बिलखिहीं अउर तू पचन्स सहारा लेइहीं।