40 सबहिं लोग नगर मँ सुलैमान क पाछे आएन। उ पचे बांसुरी बजावत रहेन अउ खुसी क नारा लगावत रहेन। उ पचे ऍतना सोर करत रहेन कि धरती काँप उठी।