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मुकाशफ़ा 20:12 - उर्दू हमअस्र तरजुमा

12 और मैंने छोटे बड़े तमाम मुर्दों को तख़्त-ए-इलाही के सामने खड़े देखा। तब किताबें खोली गईं, फिर एक और किताब खोली गई यानी किताब-ए-हयात; और जिस तरह उन किताबों में दर्ज था, तमाम मुर्दों का इन्साफ़ उन के आमाल के मुताबिक़ किया गया।

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इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 2019

12 फिर मैंने छोटे बड़े सब मुर्दों को उस तख़्त के सामने खड़े हुए देखा, और किताब खोली गई, या'नी किताब — ए — हयात; और जिस तरह उन किताबों में लिखा हुआ था, उनके आ'माल के मुताबिक़ मुर्दों का इन्साफ़ किया गया।

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किताब-ए मुक़द्दस

12 और मैंने तमाम मुरदों को तख़्त के सामने खड़े देखा, ख़ाह वह छोटे थे या बड़े। किताबें खोली गईं। फिर एक और किताब को खोल दिया गया जो किताबे-हयात थी। मुरदों का उसके मुताबिक़ फ़ैसला किया गया जो कुछ उन्होंने किया था और जो किताबों में दर्ज था।

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मुकाशफ़ा 20:12

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