मरक़ुस 4:27 - उर्दू हमअस्र तरजुमा27 रात और दिन चाहे, वह सोए या जागता रहे, बीज उग कर आहिस्ता-आहिस्ता बढ़ते रहते हैं और उसे मालूम भी नहीं पड़ता, वह कैसे उगते और बढ़ते हैं। Viz kapitolaइंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) उर्दू - 201927 और रात को सोए और दिन को जागे और वो बीज इस तरह उगे और बढ़े कि वो न जाने। Viz kapitolaकिताब-ए मुक़द्दस27 यह बीज फूटकर दिन-रात उगता रहता है, ख़ाह किसान सो रहा या जाग रहा हो। उसे मालूम नहीं कि यह क्योंकर होता है। Viz kapitola |